बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता: बीईओ दुबे.

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता: बीईओ दुबे.
कोटा में पांच संकुलों के प्रधान पाठकों और शिक्षकों की विशेष मोटिवेशनल कार्यशाला, नई सोच और नई ऊर्जा के साथ शिक्षण कार्य करने का आह्वान
कोटा। बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार को लेकर कोटा विकासखंड शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री गोपाल कृष्ण दुबे के मार्गदर्शन में पांच संकुलों—कन्या कोटा, डीकेपी, धौराभाठा, पीपरतराई एवं सल्का नवागांव—के प्रधान पाठकों, शिक्षकों एवं सहायक शिक्षकों के लिए विशेष मोटिवेशनल कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला को दो पालियों में आयोजित किया गया। प्रथम पाली में सभी प्रधान पाठकों तथा द्वितीय पाली में समस्त शिक्षकों की बैठक एवं प्रशिक्षण सत्र हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में नई ऊर्जा का संचार करते हुए बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाना तथा प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता और सीखने के स्तर के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित करना रहा।

इस अवसर पर बीईओ गोपाल कृष्ण दुबे ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक जरूरत, क्षमता और कमजोरी को पहचानकर उसे आगे बढ़ाने का प्रयास करें।
उन्होंने शिक्षकों से नई दृष्टि, नई सोच और नई ऊर्जा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति, उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षणिक प्रगति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षक यदि अपनी जिम्मेदारी को मिशन के रूप में निभाएं तो शिक्षा व्यवस्था में निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
बच्चों के स्तर को पहचानकर करें शिक्षण—आशा दत्ता
कार्यशाला में कन्या कोटा की प्राचार्य श्रीमती आशा दत्ता ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों को बच्चों के शैक्षणिक स्तर की पहचान कर उसी के अनुरूप शिक्षण पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा अलग क्षमता और अलग गति से सीखता है। ऐसे में शिक्षक का दायित्व है कि वह बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझते हुए शिक्षण की रणनीति तैयार करे।
कार्यक्रम में डीकेपी प्राचार्य सीमा त्रिखा दत्त, कन्या कोटा प्राचार्य श्रीमती आशा दत्ता, प्रभारी प्राचार्य अपर्णा लाल, संकुल समन्वयक हुकुमचंद पटेल, लव सिंह जौहर, आलोक सोनी, रामप्रसाद साहू एवं राजकुमार कोरी सहित पांचों संकुलों के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान पाठक, शिक्षक एवं सहायक शिक्षक उपस्थित रहे।
शिक्षकों में दिखा उत्साह, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
पूरे समय चले इस आयोजन में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार, कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान तथा विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संकुल प्राचार्य एवं संकुल समन्वयक, कन्या कोटा का विशेष योगदान रहा।
शिक्षा विभाग की इस पहल से यह संदेश स्पष्ट है कि कोटा विकासखंड में अब शिक्षा व्यवस्था को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने के मिशन के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।




