कक्षा 3 की बच्ची का कान पकड़कर उठाने का आरोप, कान से निकला खून!


कक्षा 3 की बच्ची का कान पकड़कर उठाने का आरोप, कान से निकला खून!
मुसियारी के सरकारी स्कूल में कथित शारीरिक दंड से हड़कंप, पालक ने DEO से लेकर बाल संरक्षण आयोग तक की शिकायत
बिलासपुर। कोटा विकासखंड के वनांचल क्षेत्र स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मुसियारी में कक्षा 3 में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ कथित मारपीट और शारीरिक दंड दिए जाने का मामला सामने आया है। पालक का आरोप है कि शिक्षक ने बच्ची का कान पकड़कर उसे ऊपर उठाया और ऐंठा, जिससे उसके कान में चोट आई और खून निकल आया। बच्ची की पहचान गोपनीय रखी जा रही है।
घटना से संबंधित तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला गंभीर चर्चा में है। पालक ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ पहले भी मारपीट की जा चुकी है और यह पहली घटना नहीं है।
कान पकड़कर ऊपर उठाने का आरोप, चोट लगने की बात
पालक के अनुसार, हाल की घटना में शिक्षक ने बच्ची का कान पकड़कर जोर से ऊपर उठाया तथा ऐंठा। इसके बाद उसके कान में चोट लगी और खून निकलने की बात सामने आई। परिवार का आरोप है कि बच्ची को कभी हाथ तो कभी पैर में भी मारा जाता रहा है।
पालक द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में बच्ची के कान पर चोट के निशान दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि, चोट की वास्तविक वजह और घटना की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पिछले साल भी मारपीट का आरोप, विरोध के बाद मांगी थी माफी
पालक का कहना है कि बीते वर्ष भी इसी बच्ची के साथ शिक्षक द्वारा कथित मारपीट की गई थी। उस समय परिवार ने शिक्षक के व्यवहार का विरोध किया था। पालक के मुताबिक, विरोध के बाद शिक्षक ने माफी मांगी थी।
अब दोबारा ऐसी शिकायत सामने आने के बाद परिवार ने मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया है।
शिक्षक ने सजा देने की बात स्वीकार की—बताया पढ़ाई में पीछे रहना कारण
मामले की जानकारी लेने पर शिक्षक गोपाल सिंह ने बच्ची को सजा देने की बात स्वीकार की। शिक्षक के अनुसार बच्ची पढ़ने-लिखने में पीछे रहती है, इसलिए उसे सजा दी गई।
शिक्षक के इस कथन के बाद मामला और गंभीर हो गया है। सवाल यह है कि पढ़ाई में कमजोर होने पर किसी बच्चे को शारीरिक दंड देने का अधिकार आखिर किसे है?
मारपीट से बच्ची को लगी चोट और घटना की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
DEO से लेकर बाल संरक्षण आयोग तक पहुंचा मामला
पालक की शिकायत के आधार पर मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर को दी गई है। साथ ही मामला छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग तक भी पहुंचाया गया है।
शिकायत में बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने, घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने उठाए बाल सुरक्षा पर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा के मुताबिक पालक ने उन्हें फोन और व्हाट्सऐप के माध्यम से घटना की जानकारी दी। उनका कहना है कि बच्ची के कान से खून निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने उपलब्ध तस्वीर और वीडियो देखे तथा शिक्षक से भी बातचीत की।
प्रदीप शर्मा ने कहा कि शिक्षक ने बातचीत में बच्ची के पढ़ाई में पीछे रहने की बात कहते हुए उसे सजा देने की बात बताई। उनके अनुसार, मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है, इसलिए उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है।
स्कूल में महिला शिक्षिका भी पदस्थ, घटना को लेकर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि स्कूल में एक महिला शिक्षिका भी पदस्थ हैं।
यदि घटना स्कूल में हुई, तो क्या उन्हें इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो क्या उन्होंने बच्ची की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप किया अथवा संबंधित अधिकारियों को सूचना दी?
हालांकि, महिला शिक्षिका की भूमिका या घटना के संबंध में उनकी जानकारी को लेकर फिलहाल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस पहलू की भी विभागीय जांच आवश्यक है।
स्कूल के आसपास नशे के सामान की बिक्री के भी आरोप
पालक एवं शिकायतकर्ताओं ने स्कूल के आसपास अवैध शराब, गुटखा पाउच और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री होने के आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि इस संबंध में पहले भी शिकायतें की गई हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस द्वारा जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि स्कूल के आसपास वास्तव में इस प्रकार की गतिविधियां हो रही हैं या नहीं। शिकायतकर्ता का दावा है कि कोटा ब्लॉक में बच्चों के साथ कथित मारपीट का यह दूसरा मामला है। इससे पहले एक निजी स्कूल में राज्यगीत नहीं गाने को लेकर एक बच्चे की कथित पिटाई का मामला सामने आने की बात कही गई थी।
उस मामले में भी शिक्षा विभाग से शिकायत किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस पुराने मामले और उस पर हुई विभागीय कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—बच्चों को सुरक्षित माहौल कब मिलेगा?
मुसियारी स्कूल की घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर शारीरिक दंड दिए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
यदि जांच में बच्ची के साथ मारपीट और शारीरिक दंड के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी होगा। वहीं, लगाए गए प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो सके।
क्या बच्ची के साथ वास्तव में शारीरिक दंड दिया गया?
क्या चोट इसी घटना में लगी?
क्या पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं?
क्या स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित व्यवस्था का पालन हो रहा है?
और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार व्यक्ति पर क्या कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब अब शिक्षा विभाग और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों की जांच से सामने आने हैं।
शिक्षक गोपाल सिंह का पक्ष: शिक्षक ने बातचीत में बच्ची को सजा देने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि बच्ची पढ़ने-लिखने में पीछे रहती है, इसलिए उसे सजा दी गई। मारपीट से चोट लगने तथा अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। शिक्षक का विस्तृत पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।







