कोटा में आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री का खेल! 20 टुकड़ों में रजिस्ट्री का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं।

कोटा में आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री का खेल! 20 टुकड़ों में रजिस्ट्री का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं।
नियम-कायदे ताक पर रखकर कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग, आखिर जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों?
कोटा। बिलासपुर। नगर पालिका कोटा क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और अवैध प्लॉटिंग को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। नगर पालिका कोटा की कृषि भूमि पर कथित रूप से बिना सक्षम अनुमति के अवैध प्लॉटिंग कर छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन बेचने और रजिस्ट्री कराए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार जमीन को करीब 20 टुकड़ों में बांटकर बिक्री एवं रजिस्ट्री का खेल चल रहा है। इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
खसरा नंबर 633, कुल रकबा 2.0770 हेक्टेयर
शिकायत में कोटा, प.ह.नं. 07, राजस्व निरीक्षक मंडल कोटा, तहसील कोटा, जिला बिलासपुर स्थित खसरा नंबर 633, रकबा 2.0770 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार उक्त भूमि राजस्व अभिलेख में कृषि भूमि के रूप में दर्ज है।
आरोप है कि भू-माफियाओं एवं अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा बिना सक्षम प्राधिकारी से छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 172 के तहत विधिवत व्यपवर्तन (डायवर्सन) कराए तथा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से ले-आउट की अनुमति प्राप्त किए बिना जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। सड़क निर्माण कर जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बेचने का भी आरोप लगाया गया है।
20 टुकड़ों में जमीन की रजिस्ट्री का आरोप।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कृषि भूमि को करीब 20 छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बिक्री और रजिस्ट्री की गई है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल अवैध प्लॉटिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भूमि क्रेताओं के हितों और शासन के राजस्व से भी जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
इस संबंध में दिनांक 22 अक्टूबर 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा को लिखित शिकायत सौंपकर अवैध प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाने, भूमि की डायवर्सन एवं ले-आउट अनुमति की जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में तहसीलदार कोटा एवं नगर विभाग से संयुक्त जांच कराने और अवैध निर्माण हटाने की मांग भी की गई है।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल…
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस तरह की शिकायत राजस्व विभाग तक पहुंच चुकी है, तो अब तक जांच और कार्रवाई की स्थिति क्या है? क्या संबंधित भूमि की रजिस्ट्री, डायवर्सन और ले-आउट की अनुमति की जांच की गई है? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी बाहरहाल यह देखने वाली बात होगी,



