चक्रधर समारोह में श्वेता नायक और शिष्यों की कुचिपुड़ी प्रस्तुति ने रचा सांस्कृतिक आकर्षण।


चक्रधर समारोह में श्वेता नायक और शिष्यों की कुचिपुड़ी प्रस्तुति ने रचा सांस्कृतिक आकर्षण
‘शिवशक्ति समर्पण’ में भारतीय शास्त्रीय परंपरा, भक्ति और नृत्य-सौंदर्य का मनोहारी संगम; दर्शकों ने तालियों से किया कलाकारों का अभिनंदन

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह के प्रतिष्ठित मंच पर बिलासपुर की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना नृत्यविभूषण श्वेता नायक एवं उनके शिष्यों ने ‘शिवशक्ति समर्पण’ शीर्षक से कुचिपुड़ी की मनोहारी प्रस्तुति देकर भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य परंपरा की समृद्ध छटा बिखेरी। प्रस्तुति में भक्ति, भाव, लय, ताल और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का ऐसा सुंदर समन्वय देखने को मिला कि दर्शक देर तक उससे जुड़े रहे। प्रस्तुति के दौरान तालियों की गूंज ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
‘शिवशक्ति समर्पण’ केवल नृत्य प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विविध भावों को मंच पर जीवंत रूप मिला। शास्त्रीय नृत्य की परंपरागत मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध पदसंचालन के माध्यम से देवी-देवताओं के स्वरूप, भक्ति और भारतीय आध्यात्मिक चिंतन की सुंदर अभिव्यक्ति हुई। प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की उस परंपरा से जोड़ा, जिसमें नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भाव, साधना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम माना जाता है।
नाट्यचूड़ामणि डॉ. जी. रतीश बाबू की शिष्या श्वेता नायक कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम एवं मोहिनीअट्टम की सुप्रसिद्ध कलाकार तथा दूरदर्शन की हाई-ग्रेडेड कलाकार हैं। वे बिलासपुर स्थित साई नृत्य निलयम् की संस्थापक एवं निदेशक हैं और शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
प्रस्तुति का आरंभ आदि शंकराचार्य रचित ‘मीनाक्षी पंचरत्नम्’ से हुआ। रागमालिका एवं आदि तालम् में देवी मीनाक्षी की दिव्यता और सौंदर्य को भावपूर्ण नृत्याभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात ‘तरंगम्’ में जटिल पदसंचालन, लयकारी और पीतल की थाली पर संतुलित नृत्य ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
भगवान शिव के गंगाधर, चंद्रचूड़ एवं आनंद नटराज स्वरूपों का प्रभावशाली चित्रण प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रहा। नृत्य की मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से शिव के विभिन्न स्वरूपों की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक छवियां मंच पर साकार हुईं। इससे प्रस्तुति में भारतीय दर्शन, भक्ति परंपरा और शास्त्रीय कला का सुंदर समन्वय दिखाई दिया।
गुरु श्वेता नायक के साथ एन. स्तुति रेड्डी, एन. दिव्यांका, हर्षिता कैवर्त, श्रीदिप्ता पॉल, श्वेता सालिनी नायक, डी. धारणी, चेतन्या साहू, मेघा सारथी एवं ऐश्वर्या ने सहभागिता की। संगीत संयोजन एवं गायन में रेणुका प्रसाद एवं श्वेता प्रसाद का विशेष योगदान रहा।
‘शिवशक्ति समर्पण’ के माध्यम से चक्रधर समारोह के मंच पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गुरु-शिष्य परंपरा, सांस्कृतिक निरंतरता और कलात्मक अनुशासन की प्रभावशाली झलक देखने को मिली। प्रस्तुति ने यह भी रेखांकित किया कि शास्त्रीय कलाएं आज भी नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कुचिपुड़ी की भावपूर्ण प्रस्तुति ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को समृद्ध करते हुए कला प्रेमियों के बीच अपनी विशेष छाप छोड़ी।







