अपराधछत्तीसगढ़बिलासपुर संभागरमेश भट्ट - एडिटर& चीफ।

बिलासपुर में QR कोड के जरिए 45 च्वाइस सेंटर संचालकों से धोखाधड़ी, दो आरोपी गिरफ्तार।

बिलासपुर में QR कोड के जरिए 45 च्वाइस सेंटर संचालकों से धोखाधड़ी, दो आरोपी गिरफ्तार।

20 से 25 लाख रुपये की ठगी का अनुमान, 1.02 लाख रुपये नकद, बोलेनो कार, स्कूटी और दो मोबाइल जब्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में च्वाइस सेंटर संचालकों के क्यूआर कोड का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का रेंज साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में रायपुर निवासी दो आरोपियों अंकित आहूजा (32) और आशीष केवटवानी (32) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर बिलासपुर सहित रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनके आधार पर धोखाधड़ी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपये बताई गई है। आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल की गई एक बोलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।

ऐसे देते थे धोखाधड़ी को अंजाम

मामले की शुरुआत बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक की शिकायत से हुई। शिकायत के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बोलेनो कार से सेंटर पहुंचा। उसने खुद को मोबाइल फोन-पे लेनदेन से जुड़ा बताते हुए क्यूआर कोड के बदले नकद रकम देने की बात कही। संचालक की सहमति मिलने पर आरोपी क्यूआर कोड की तस्वीर अपने मोबाइल में लेकर चला गया।
इसके बाद क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपये का लेनदेन किया गया। संचालक को रकम मिलने के बाद अगले दिन उसके बैंक खाते पर होल्ड लग गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि उसका फोन-पे खाता साइबर फ्रॉड से जुड़े मामले में होल्ड किया गया है।
अलग-अलग जिलों में बनाते थे शिकार
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी अंकित आहूजा ने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर वारदात करना स्वीकार किया। आरोप है कि अंकित अलग-अलग च्वाइस सेंटरों में जाकर संचालकों के क्यूआर कोड की तस्वीर अपने साथी को भेजता था। इसके बाद आशीष उस क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर करता था, जबकि अंकित संचालक से नकद रकम लेकर निकल जाता था।
संचालकों के बैंक खाते होल्ड होने पर उन्हें पता चलता था कि उनके खाते में आई रकम साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी रायपुर से निकलकर अलग-अलग जिलों में जाकर इस तरीके से वारदात करते थे।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हुई कार्रवाई
मामले में अपराध क्रमांक 05/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) में अपराध दर्ज किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश और मार्गदर्शन में गठित टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की। इसी दौरान अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा वारदात करने के प्रयास में घूमता मिला, जिसे पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दूसरे आरोपी की भूमिका भी सामने आई। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी रेंज साइबर बिलासपुर प्रसाद सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अशोक कश्यप, आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस की अपील: च्वाइस सेंटर संचालक किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने क्यूआर कोड की तस्वीर साझा करने या उसके कहने पर लेनदेन करने से पहले पूरी सावधानी बरतें। किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तत्काल बैंक और साइबर पुलिस को दें।

Youtube Channel

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!