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संतान प्राप्ति के लिए मंगला गौरी के साथ उनके पुत्र स्कंध की पूजा करवाई जाती है ,।नवरात्र स्पेशल स्टोरी।

मनमोहन सिंह✍️

बिलासपुर कोटा खैरा ।  वैश्विक महामारी कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से गत वर्ष लोगों को वायरस की चपेट से सुरक्षित रखने मां जगत जननी की मूर्ति स्थापना के साथ मंदिर में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई थी। जिसे लेकर श्रद्धालुओं में निराशा बनी हुई थी। जिस पर अब प्रशासन द्वारा नियम एवं शर्तें अनुसार नवरात्र बनाने छूट मिलने के बाद ग्रामीण अंचल में हर्षोल्लास के साथ मां दुर्गा की विधि पूर्वक पूजा अनुष्ठान के साथ हर्षोल्लास से नवरात्र मनाई जा रही है।

     ग्राम पंचायत खैरा,चपोरा,सेमरा,पोड़ी, बिरगहनी,उमरिया दादर,पुडू सहित पूरे अंचल में कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं को माता के दर्शन करने प्रवेश दिया जा रहा है।ग्राम खैरा में आचार्य नर्मदा प्रसाद दुबे,मनोज डूबे और यजमान रुपेश आर्मो पत्नी महेश्वर देवी आर्मो एवं राम किशुन जायसवाल पत्नी राम कुमारी जायसवाल सहित समस्त ग्रामीणों द्वारा सुबह शाम वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा करते हुए आरती की जा रही है।जिससे चारों ओर भक्तिमय ऊर्जा का संचारण हो रहा है।रात्रिकालीन जगराता का आयोजन हो रहा है। ग्राम खैरा में 25 मनोकामना अखंड ज्योति कलश प्रज्वलित किया है। जिसकी भक्तजन प्रतिदिन आशीर्वाद ले रहे हैं।खूबसूरत आदिवासी वनांचल क्षेत्र के ग्राम सेकर स्थित माता चौरा अंचल की प्रख्यात मंदिर है।जहां श्रद्धालुओं की 160 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित हो रहा है। अंचल के लोगों की आस्था है की मां महामाया अपनी शरण में आए भक्तों की दुख को हर कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती है। वही मुख्य द्वार पर विराजमान पवन पुत्र हनुमान और श्री सिद्धिविनायक गणेश महाप्रभु विराजमान होकर श्रद्धालुओं की रक्षा रहे हैं। अंचल के हजारों श्रद्धालुओं की माता के दरबार से विशेष आस्था जुड़ी हुई है।मान्यता है कि सच्चे मन से जो भी श्रद्धालु दरबार में प्रार्थना करता है,उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।


मांगलिक दोष एवं संतान के लिए होती है विशेष पूजा –

 ग्राम पंचायत पोड़ी स्थित मंगला गौरी धाम  में कुंडली में यदि ग्रह दोष है तो जीवन में कई विपत्ति का सामना करना पड़ता है।जिसके निवारण के लिए ग्रह दोष अनुसार गौरी गणेश,कलश,नवग्रहों,सोडष उपचार, मातृका के साथ मां मंगला गौरी की पूजा की जाती है जिसमें चतुर्मुख दिया जलाया जाता है, ताकि ग्रह दोष शांति के लिए पूजा संपन्न की जा सके। वही संतान प्राप्ति के लिए मंगला गौरी के साथ उनके पुत्र स्कंध पूजा करवाई जाती है जिससे निसंतान दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति हो सके।

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