आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क को तरस रहे ग्रामीण, पुरानी पीढ़ी चली गई, पक्की सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ।


आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क को तरस रहे ग्रामीण, पुरानी पीढ़ी चली गई, पक्की सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
बिलासपुर/कोटा। मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हो या संपर्क मार्ग की सुविधा, आम ग्रामीणों के लिए इन्हें हासिल करना आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है। कोटा जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत करही कछार के आश्रित ग्राम केकराडीह, खोलीपरा लगभग पंद्रह सौ से अधिक आबादी वाले ग्रामीण पिछले कई दशकों से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों के अनुसार, रतखंडी पंचायत के ग्राम बरर से केकराडीह-खोलीपारा की ओर जाने वाला करीब चार किलोमीटर का मार्ग आज भी कच्चा और गड्ढों से भरा हुआ है। बारिश के दिनों में इस सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। जगह-जगह कीचड़ और पानी भरने के कारण मोटरसाइकिल , साइकिल तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

बारिश में एक गांव से दूसरे गाँव का टूट जाता संपर्क
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान अरपा नदी पर बने एनीकट के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे समय में ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए बाहर निकलने में भारी परेशानी होती है। सबसे बड़ी चिंता बीमार और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने को लेकर रहती है। ग्रामीणों के मुताबिक, कीचड़ और पानी के कारण कई बार एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।
चुनाव के समय वादे, बाद में भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि.
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि उनकी सड़क समस्या को प्राथमिकता से हल करने का आश्वासन देते रहे हैं। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। वर्षों से आश्वासन मिलने के बावजूद सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के कई गांवों में पक्की सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन केकराडीह, खोलीपरा और के लोग आज भी कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। उनका सवाल है कि जब विकास योजनाओं के तहत सड़कों का निर्माण हो रहा है तो उनके गांव तक यह सुविधा आखिर कब पहुंचेगी?
पुरानी पीढ़ी चली गई, सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बुजुर्ग सड़क निर्माण की मांग करते-करते दुनिया से चले गए, लेकिन गांव की सड़क आज भी जस की तस है। नई पीढ़ी भी उसी समस्या का सामना कर रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि महज आश्वासन देने के बजाय करीब तीन से चार किलोमीटर के इस मार्ग का स्थायी समाधान करते हुए पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है—अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।
केकराडीह-खोलीपारा के ग्रामीणों की यह समस्या विकास के दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर मूलभूत सड़क सुविधा से वंचित इन गांवों की सुध कब ली जाएगी?







