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जल,जंगल और जमीन को संरक्षित करने की मुहिम केवल कागजों पर जिसकी चिंता ना तो शासन को है और ना ही प्रशासन को।

 

जल,जंगल और जमीन को संरक्षित करने की मुहिम केवल कागजों पर ही।

मनमोहन सिंह ✍️  संवाददाता

बिलासपुर कोटा,खैरा.। जल,जंगल और जमीन को संरक्षित करने की मुहिम केवल कागजों पर ही सिमटता हुआ नजर आ रहा हैं।जिसकी चिंता ना तो शासन को है और ना ही प्रशासन।वन्यजीवों को सुरक्षित रखने वाली विरान घने जंगलो का अस्तित्व अब समाप्त हो रहा है।जंगल में बेतरतीब तरीके से काटी गई पेड़ों की ठूठ प्रकृति से खिलवाड़ की दर्द बयां कर रही है।जिस पर अंकुश की मरहम लगाना तो दूर विभाग मुख दर्शक बने उजड़ते जंगल की स्वयं साक्षी बन रही है। लाखों,करोड़ों रुपए खर्च कर विभाग द्वारा जंगलों में पौधे रोपित किया जाता है।जिसे सुरक्षित रखने की जवाबदारी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों को दी जाती है।ताकि पेड़ों को अवैध तस्करी एवं अवैध जमीन कब्जाधारीयो से बचाया जा सके। वन परीक्षेत्र रतनपुर अंतर्गत आने वाले खैरा-चपोरा मुख्य मार्ग स्थित जंगलों के वन विकास और वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की गैर मौजूदगी की वजह से सालो से जंगलों की निरंतर अंधाधुंध कटाई कर जमीन की अवैध कब्जा और लकड़ी तस्करी का खेल जोरों से चल रहा है।इमारती पेड़ सागौन,नीलगिरी के साथ अन्य पेड़ों की अंधाधुन कटाई अब आम बात हो गई है।सुबह हो या शाम लोग मुख्य मार्ग से लगे जंगल की खुलेआम कटाई कर राहगीरों को विभाग की लापरवाही का आईना दिखाने में जरा भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं।विभाग द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने से लोगों का हौसला बुलंद है। जो पेड़ों की अंधाधुन कटाई कर पूरे जंगल को ठूठ में तब्दील कर रहे हैं। आखिर इतने बड़े नुकसान की जिम्मेदार कौन और कैसे होगी इसकी भरपाई। वर्तमान परिस्थिति में लचर व्यवस्था की वजह से जिस पर अंकुश लगाने विभागीय अमला पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो रहा है।वर्तमान व आने वाली पीढ़ी की समृद्धि एवं स्वस्थ रहन-सहन के लिए पेड़ों का होना अत्यंत आवश्यक है।समय रहते यदि पेड़ों को बचाया नहीं गया तो वह दिन दूर नहीं जब लोग ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जुझते हुए पानी की कमी, तेज गर्मी और शुद्ध वातावरण के लिए त्राहिमाम करेंगे।

वन्यजीवों के संरक्षण पर उठने लगा सवाल —–

— घने जंगलों का सिमटता हुआ दायरा वन्यजीवों के लिए काल बनता जा रहा है। जंगल का का घटता हुआ रखवा रकबा विचरण करने वाले वन्य जीवो के लिए के लिए खतरा पैदा कर रहा है।पेड़ों की कमी होने से वन्य जीव शिकारीयो की नजर में आकर शिकार हो रहे हैं।जंगली शूकर,खरगोश,चीतल का शिकार किया जा रहा है। जिसका मुख्य कारण है,घने जंगलों का मैदानी क्षेत्र में तब्दील होना।

आखिर क्यों नहीं थम रहा अवैध कटाई,कौन है जिम्मेदार —-

– पेड़ों की कटाई रुकने की बजाए लगातार कटाई में और इजाफा होता जा रहा है।ना लोगों में पेड़ों की कटाई की भूख खत्म हो रही है और ना ही से बचाए रखने आम नागरिकों में जागरूकता आ रही है।जंगलों के ठूंठ की स्थिति देख लगता है,मानो लोगों ने जंगल को समाप्त करने मन ही बना लिया है।और इस खेल में मुख दर्शक बने जंगल विभाग की भूमिका भी अहम दिखाई दे रही है।

आनंद मरावी सदस्य जिला पंचायत बिलासपुर----

वन विभाग के कोई भी कर्मचारी फील्ड में नहीं आते हैं। 4 माह में एक बार दौरा कर खानापूर्ति किया जाता है। विभाग के सुस्त रवैया की वजह से जंगल उजड़ता जा रहा है।

रवि परिहार सचिव जिला कांग्रेस कमेटी-----

विभाग के सुस्त रवैया की वजह से जंगलों की अंधाधुन कटाई हो रही है। मुख्य मार्ग में बेधड़क पेड़ों की कटाई होना विभाग की नाकामी को दर्शाता है।ऐसे अधिकारी कर्मचारियों पर कार्यवाही होना चाहिए।

कुमार निशांत डीएफओ बिलासपुर ---

— मैं अभी छुट्टी में हूं।जहां-जहां कटाई हो रही है उसकी जानकारी भेज दीजिए।टीम भेजकर उस जगह को दिखवाता हूं।

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