छत्तीसगढ़बिलासपुर संभाग

बिलासपुर प्रेस क्लब के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव के बीच अब केवल एक ही दिन रह गया है शेष ।

 

बिलासपुर।जैसे-जैसे मतदान की तिथि करीब आ रही है चुनाव की सरगर्मियां भी तेज होती जा रही है। इस चुनाव में 3 पैनल के साथ कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में है। मुख्य मुकाबला आशीर्वाद, विकास और विश्वास पैनल के बीच है। इस बीच मतदाता पत्रकारों को रिझाने और अपने मेनिफेस्टो से अवगत कराने के लिए सभी पैनल द्वारा पत्रकार मिलन समारोह आयोजित किया जा रहा है, जहां उपस्थित होने वाले पत्रकारों की संख्या से ही यह आंकलन किया जाने लगा है कि किसका पलड़ा भारी है। इस लिहाज से फिलहाल तो आशीर्वाद पैनल मुकाबले में कई कदम आगे नजर आने लगा है। गुरुवार को शहर के यश पैलेस में आशीर्वाद पैनल के प्रत्याशियों द्वारा चुनाव प्रचार के मद्देनजर पत्रकार मिलन और आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें नए पुराने सभी पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

 

अपेक्षा से भी अधिक संख्या में पहुंचे पत्रकार मतदाताओं के समर्थन से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मनीष शर्मा, उपाध्यक्ष प्रत्याशी अमित मिश्रा , सचिव प्रत्याशी इरशाद अली, कोषाध्यक्ष देव दत्त तिवारी, सह सचिव भूपेश ओझा और कार्यकारिणी सदस्य के प्रत्याशी नीरज शर्मा बेहद उल्लासित नजर आए।समारोह की खास बात यह रही कि आशीर्वाद पैनल द्वारा अपनी बात रखने से पहले अपने बीच मौजूद वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों वर्ग के पत्रकारों को अपने विचार और शिकायत रखने का अवसर अपने ही मंच से प्रदान किया गया।आलोचनाओं को भी आशीर्वाद के रूप में लेने की परंपरा आरंभ करते हुए आशीर्वाद पैनल ने अपने कटु आलोचक सुनील शर्मा और विकास चौबे को सर्वप्रथम अवसर दिया, जिन्होंने खुलकर पत्रकार हित में अपनी बातें रखी और अपने सवालों के साथ पत्रकारों के बीच पनप रहे ज्वलंत प्रश्नों से भी प्रत्याशियों को अवगत कराया ।


इस समारोह का सबसे मुख्य आकर्षण सचिव पद के प्रत्याशी और बिलासपुर प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति के मौजूदा अध्यक्ष इरशाद अली का संबोधन रहा, जिन्होंने लंबी खामोशी को तोड़ते हुए जब अपने मन की व्यथा और संघर्ष की कहानी सुनाई तो सभागार में मौजूद श्रोता स्तब्ध रह गए। उनके भाषण में ना तो शब्दों की गहरी बुनावट थी और ना हीं अलंकारों के छलावे का मायाजाल। इसी कारण सीधे उनके दिल से निकली बात मतदाताओं के दिलों में उतरती चली गई।
पिछले दिनों जिस तरह से पत्रकारों को डेढ़ लाख रुपए में 2 बीएचके फ्लैट देने का वादा एक पैनल द्वारा किया गया था उसकी बखिया उधेड़ते हुए इरशाद अली ने स्पष्ट किया कि इस जिन्न को बार बार चुनाव से पहले ही बोतल से निकाला जाता है। पिछले चुनाव में भी इसी जुमले का प्रयोग किया गया था और इस बार भी इसी काठ की हांडी को दोबारा चढ़ाकर जीत की खिचड़ी पकाने की साजिश रची जा रही है।
इरशाद अली ने बताया कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि बिलासपुर प्रेस क्लब पत्रकारों को भूखंड या फ्लैट आवंटित कर सके। अगर शासन की ओर से भूखंड या फ्लैट उपलब्ध भी हो जाता है तो भी इसके बंटन की प्रक्रिया गृह निर्माण समिति द्वारा ही की जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर गृह निर्माण समिति का गठन ही भला क्यों किया जाता ? इसलिए उन्होंने मौजूदा अध्यक्ष और सचिव द्वारा किए गए घोषणा को बेहद भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में तमाम बाधाओं के बावजूद अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। एक समय था जब विकास शुल्क ना पटने के कारण गृह निर्माण समिति के पास मौजूद जमीन की रजिस्ट्री तक संभव नहीं थी और ना ही यहां मकान बनाना ही संभव था। ऐसे में तमाम तकनीकी और शासकीय बाधाओं को दूर करते हुए इरशाद अली ने गृह निर्माण समिति के बिरकोना स्थित आवासीय कॉलोनी में मकान बनना सुनिश्चित करवाया, जिसके परिणाम में वर्तमान में करीब दर्जन भर मकान यहां बन चुके हैं। सड़क ,बिजली, पानी की पाइप लाइन जैसी सुविधाएं इस दौरान उपलब्ध कराई गई है। कुछ सड़कों का टेंडर हो चुका है। जल्द ही यहां सामुदायिक भवन का निर्माण भी होगा। अन्य सुविधाएं भी जोड़ी जा रही है। खास बात यह है कि तमाम प्रयासों के बाद बिलासपुर प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति के मौजूदा अध्यक्ष इरशाद अली पत्रकारों के लिए 5 एकड़ से अधिक भूमि प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन दुख का विषय यह है कि बिलासपुर प्रेस क्लब के ही मौजूदा दो पदाधिकारी बार-बार उनके इस प्रयास में अड़चन पैदा कर रहे हैं। व्यक्तिगत स्वार्थ और हित को ध्यान में रखकर बिलासपुर प्रेस क्लब के यह दो पदाधिकारी पत्रकारों का अहित कर रहे हैं, जो नहीं चाहते कि किसी भी कीमत पर बिलासपुर प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति को 5 एकड़ जमीन मिल सके और उसका आवंटन प्रेस क्लब के पत्रकारों को हो सके। इसीलिए बार-बार इस प्रयास में बाधक बन कर यह दोनों पदाधिकारी एक तरफ तो पत्रकारों का अहित कर रहे हैं और दूसरी और उन्हीं पत्रकारों को एक आवेदन की पावती दिखाकर यह सब्जबाग दिखा रहे हैं कि उन्हें महज डेढ़ लाख रुपए में टू बीएचके फ्लैट दिलाया जाएगा। जबकि शासन की ऐसी कोई योजना नहीं है जिसमें सरकार 15 लाख रुपए खर्च कर उन्हीं मकानों को किसी को डेढ़ लाख रुपए में दे दे और ना ही इस तरह की कोई योजना स्वीकृत हुई है । यही कारण है कि डेढ़ लाख रुपए में फ्लैट देने का दावा करने वाले पदाधिकारी इस पर ना तो कोई दस्तावेज पेश कर पा रहे हैं और ना ही इस बारे में शपथ पत्र देकर पत्रकारों को यह आश्वासन दे पा रहे हैं कि वे उन्हें डेढ़ लाख में टू बीएचके फ्लैट देंगे। अपने भाषण में इरशाद अली ने इसे शेखचिल्ली का सपना बताते हुए कहा कि कुछ लोग बुद्धिजीवी पत्रकारों को बुद्धू जीवी समझ बैठे हैं और केवल उनका वोट हासिल करने के लिए कुछ भी अनाप-शनाप झूठ बोला जा रहा है । बेलाग होकर बोलते हुए इरशाद अली ने कहा कि वे यह वादा नहीं करते कि पत्रकारों के लिए आसमान से तारे तोड़ कर लाएंगे, लेकिन अगर उन्हें अवसर मिला तो वे अवश्य जल्द ही 5 एकड़ जमीन हासिल कर उसका बटवारा शेष बचे पत्रकारों में करेंगे और अगर मौजूदा बाधक बने पदाधिकारी हट जाते हैं तो संभव है कि जल्द ही और भी भूमि पत्रकारों को आवंटित होगी। उन्होंने यह सच्चाई उजागर किया कि पत्रकार जिन्हें अपना नेता मान बैठे हैं , वहीं असल में खलनायक है।
इस समारोह में पहुंचे वरिष्ठ जनों हबीब मेमन, बलदेव सिंह ठाकुर , राधा कृष्ण शर्मा, कमल दुबे का समर्थन भी आशीर्वाद पैनल के साथ नजर आया, जिन्होंने दो टूक कहा कि एक दौर में बिलासपुर प्रेस क्लब का भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए जिन्हें विकल्प माना गया था, वे भी आज अवसर मिलने पर उनसे बड़े भ्रष्टाचारी साबित हुए है। इसलिए एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की आवश्यकता है। सत्ता उन्हें सौंपने की जरूरत है जो सबको साथ लेकर चलें और निस्वार्थ रूप से सबके हित की परवाह करें। इस समारोह के दौरान आशीर्वाद पैनल की ओर से कई लुभावने वायदे भी किए गए, जिसमें सामूहिक स्वास्थ्य बीमा, पुराने प्रेस क्लब भवन का जीर्णोद्धार , पत्रकारों के बच्चों के लिए निशुल्क कंप्यूटर क्लास, प्रेस क्लब हेल्प डेस्क की स्थापना, निशुल्क एंबुलेंस की सुविधा, पत्रकार परिवार की महिलाओं के लिए स्वावलंबी समूह का गठन और पत्रकारों के बच्चों के स्कूल फीस का 30% हिस्सा प्रेस क्लब की ओर से प्रदान करने जैसे लुभावने वायदे शामिल है। बिलासपुर प्रेस क्लब में विगत दो कार्यकाल में बड़ी संख्या में गैर पत्रकारों को शामिल करने की शिकायत भी बार-बार इस दौरान उभर कर आई ।पत्रकारों ने सार्वजनिक रूप से मांग की कि चुनाव परिणाम आने के 15 दिनों के भीतर एक समिति का गठन कर ऐसे गैर पत्रकारों को बिलासपुर प्रेस क्लब से बाहर का रास्ता दिखाया जाए और यह मांग किसी एक पैनल से नहीं बल्कि तीनों पैनल से की गई है। देखना होगा कि पत्रकारों की इन अपेक्षाओं पर कौन पैनल खरा उतरता है और 24 जुलाई की शाम के परिणाम में ऊंट किस करवट बैठता है। फिलहाल तो आशीर्वाद पैनल मुकाबले में मजबूत नजर आ रहा है।

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