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ग्राम पंचायत आमागोहन में फर्जी ग्राम सभा का मामला, पुरानी फोटो अपलोड कर शासन को गुमराह करने का आरोप।

ग्राम पंचायत आमागोहन में फर्जी ग्राम सभा का मामला, पुरानी फोटो अपलोड कर शासन को गुमराह करने का आरोप।

बिलासपुर। कोटा ग्राम पंचायत आमागोहन में ग्राम सभा की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारत सरकार के मेरी पंचायत (Meri Panchayat) पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित होना दर्शाया गया है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इस ग्राम सभा की न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही ग्रामवासियों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। ग्रामीणों द्वारा जांच करने पर यह भी सामने आया कि पोर्टल में अपलोड की गई बैठक की फोटो कथित रूप से वर्ष 2025 की पुरानी तस्वीर है, जिसे नई विशेष ग्राम सभा की बैठक बताकर अपलोड किया गया है। तस्वीर में अंकित दिनांक एवं समय भी पुराने आयोजन की ओर संकेत करते हैं। इससे यह आशंका गहरा गई है कि वास्तविक ग्राम सभा आयोजित किए बिना ही बैठक का रिकॉर्ड तैयार कर ऑनलाइन अपलोड कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिना जनभागीदारी और बिना ग्राम सभा की स्वीकृति के तैयार कर ब्लॉक एवं जिला स्तर पर भेज दिए जाते हैं। इससे पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित हो रही है। संविधान के 73वें संशोधन तथा पंचायत राज अधिनियम के अनुसार ग्राम सभा ग्रामीण स्वशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, जहां गांव के विकास, योजनाओं, बजट और सार्वजनिक मुद्दों पर सामूहिक निर्णय लिया जाता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव द्वारा ग्राम सभा की सूचना सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा नहीं की जाती, न ही मुनादी या अन्य माध्यमों से लोगों को जानकारी दी जाती है। परिणामस्वरूप अधिकांश ग्रामीणों को बैठक की जानकारी ही नहीं मिल पाती। ऐसे में ग्राम सभा की कार्यवाही और पारित प्रस्तावों की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि वास्तव में 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई थी, तो उसकी उपस्थिति पंजी, कार्यवाही विवरण, सूचना पत्र, मुनादी रजिस्टर तथा बैठक की वास्तविक फोटो सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं यदि ग्राम सभा आयोजित नहीं हुई और पुरानी फोटो अपलोड की गई है, तो यह शासन एवं प्रशासन को गुमराह करने का गंभीर मामला है।

स्थानीय लोगों ने सरपंच, उपसरपंच एवं पंचायत सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ग्राम सभा जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का मानना है कि “आदर्श ग्राम” की परिकल्पना तभी साकार होगी जब ग्राम सभा नियमित, पारदर्शी और जनसहभागिता के साथ आयोजित की जाए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत कोटा, जिला पंचायत बिलासपुर एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही पोर्टल में अपलोड की गई जानकारी, फोटो और ग्राम सभा से संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई गई तो पंचायतों में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती जाएगी तथा ग्रामीणों का विश्वास शासन व्यवस्था से उठ सकता है।

  • सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा की प्रतिक्रिया

“ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। बिना सूचना ग्रामीणों को शामिल किए बिना बैठक दिखाना और पुरानी फोटो अपलोड करना गंभीर मामला है। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ग्राम सभा को कमजोर करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र और जनभागीदारी मजबूत हो सके।

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