
बिलासपुर जिले के बिल्हा विधानसभा क्षेत्र के कनेरी ग्राम पंचायत कै आश्रित गांव दुर्गडीह में संचालित पत्थर खदान और क्रशर मशीन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब 30 वर्षों से चल रही खदान में लगातार ब्लास्टिंग के कारण उनके घरों में दरारें आ गई हैं, वहीं गांव में जल संकट भी गहरा गया है। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने पहले गांव में धरना दिया और अब कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर खदान को तत्काल बंद कराने की मांग की है।
दुर्गडीह गांव के ग्रामीणों का कहना है कि खदान में रोजाना होने वाली ब्लास्टिंग से उनके मकानों की दीवारें और छतें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। कई घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे लोगों के मन में हमेशा हादसे का डर बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नए बनाए गए मकानों में भी कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई देने लगती हैं।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खदान संचालन के चलते क्षेत्र का भूजल स्तर प्रभावित हुआ है। गांव के कई कुएं, हैंडपंप और अन्य जल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं को रोजाना पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
इससे पहले भी जिम्मेदार अधिकारियों व खनीज विभाग के अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं इतने नहीं मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे सुशासनतिहार में भी और ग्राम सुराज में खदान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। लेकिन इन ग्रामीणों का कोई सुनने वाला नहीं ग्रामीणों का कहना है कि बार बार पत्राचार करते हुए वो अब परेशान हो गए हैं न तो जिला प्रशासन इस पर ध्यान देता है और न ही कोई जिम्मेदार मंत्री व क्षेत्रीय विधायक।
अपने गांव के समस्याओं को लेकर सैकड़ो ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात कर खदान की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और उन्हें कब राहत मिलती है?फिलहाल दुर्गडीह के ग्रामीण सुरक्षित आवास और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी आवाज सुनकर क्या निर्णय लेता है..?




