
सूरजपुर। एसईसीएल द्वारा प्रस्तावित कोयला परियोजना और संभावित विस्थापन के विरोध में रविवार को सूरजपुर जिले के मदनपुर क्षेत्र में सर्व आदिवासी समाज का संभाग स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज प्रमुख और पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर मूल निवासियों की जमीन, जंगल और संस्कृति को खत्म करने की तैयारी की जा रही है।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि सूरजपुर जिले के लगभग 22 गांवों को कोयला खनन परियोजना के नाम पर उजाड़ने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां पेसा कानून और वन अधिकार कानून लागू हैं, इसके बावजूद ग्रामीणों की सहमति और संवैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि परियोजना लागू हुई तो हजारों परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा।
कार्यक्रम में पहुंचे सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रांतीय अध्यक्ष सुभाष परते ने कहा कि समाज पूरी मजबूती के साथ प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल जमीन का मामला नहीं बल्कि मूल निवासियों की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि किसी भी असंवैधानिक और जबरन विस्थापन का संगठन पुरजोर विरोध करेगा तथा आगामी रणनीति प्रदेश स्तर पर तैयार की जाएगी।




