सांदीपनी एकेडमी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, विकसित भारत पर केंद्रित रहा विमर्श

बिलासपुर। मस्तूरी स्थित सांदीपनी एकेडमी, मस्तूरी के प्रांगण में 16 व 17 जनवरी 2026 को “भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन सांदीपनी एकेडमी तथा शासकीय पातालेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मस्तूरी का संयुक्त प्रथम प्रयास था, जो शनिवार को सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।
सम्मेलन के द्वितीय दिवस 17 जनवरी 2026 को मुख्य अतिथि के रूप में अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलसचिव डॉ. तारनीश गौतम उपस्थित रहे। प्रथम की-नोट स्पीकर के रूप में फ्रांस से प्रो. रामेश्वर दुबे (ऑनलाइन माध्यम से) तथा द्वितीय की-नोट स्पीकर के रूप में डॉ. दिवाकर सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर एवं डायरेक्टर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, क्राइस्ट कॉलेज, भोपाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ज्योति वर्मा, सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विभाग, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं छत्तीसगढ़ राजकीय गीत के साथ हुआ। स्वागत भाषण शासकीय पातालेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मस्तूरी की प्राचार्य डॉ. दुर्गा बाजपेई द्वारा प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत पौधारोपण के माध्यम से किया गया।
इस अवसर पर सांदीपनी एकेडमी की प्राचार्य डॉ. रीता सिंह द्वारा रचित तीन पुस्तकों का विमोचन अतिथियों के करकमलों से संपन्न हुआ। साथ ही एनएसएस के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सांदीपनी एकेडमी के दो विद्यार्थियों एवं एनएसएस अधिकारी श्रीमती संगीता साहू को विश्वविद्यालय की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।मुख्य अतिथि डॉ. तारनीश गौतम ने अपने आशीर्वचन में वेदों को मानव सभ्यता की जड़ बताते हुए भारतीय जीवन मूल्यों एवं धर्मपरक जीवन शैली को अपनाने पर बल दिया। प्रथम वक्ता प्रो. रामेश्वर दुबे ने भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोचनात्मक परिप्रेक्ष्य पर सारगर्भित व्याख्यान दिया एवं प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का सरल उदाहरणों द्वारा समाधान किया।
प्रथम तकनीकी सत्र में ऑफलाइन 20 एवं ऑनलाइन 25 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। द्वितीय सत्र से पूर्व डॉ. दिवाकर सिंह ने शोधार्थियों को डिजिटल टूल्स के माध्यम से शोध कार्य एवं ई-कंटेंट विकास की विस्तृत प्रक्रिया से अवगत कराया। द्वितीय तकनीकी सत्र में 15 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. ज्योति वर्मा ने संपूर्ण सम्मेलन का सारगर्भित निष्कर्ष प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कांती आंचल, सहायक प्राध्यापक, शासकीय पातालेश्वर महाविद्यालय, मस्तूरी द्वारा किया गया।ग्रामीण अंचल में आयोजित इस प्रथम अंतरराष्ट्रीय प्रयास में कुल 187 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन पंजीयन कराया, जिनमें से 82 शोध सारांशों का चयन स्मरणिका (Souvenir) प्रकाशन हेतु किया गया।
इस सम्मेलन के संरक्षक एवं महाविद्यालय के डायरेक्टर महेंद्र चौबे रहे। प्रशासनिक अधिकारी एवं एडवाइजरी कमेटी सदस्य विनीत चौबे के सहयोग से कार्यक्रम सफल रहा। कन्वीनर के रूप में डॉ. रीता सिंह एवं डॉ. दुर्गा बाजपेई के नेतृत्व में आयोजन संपन्न हुआ। आयोजन एडवाइजरी बोर्ड सदस्य रामखिलावन साहू (आईक्यूएसी समन्वयक) ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. दीप्ति सिंह राठौड़, डॉ. मंजू पांडे, डॉ. सुजाता समयुल सहित दोनों महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।

