छत्तीसगढ़

शासन की योजना से लाभान्वित हो रहे संचालक, तो वहीं ग्रामीण हितग्राही शासन की योजना के लाभ से कोशों दूर।

आखिर अपनी व्यथा किसे सुनाएं?

 

शासन की योजना से लाभान्वित हो रहे संचालक, तो वहीं ग्रामीण हितग्राही शासन की योजना के लाभ से कोशों दूर

मनमोहन सिंह✍️

कोटा। वर्तमान परिस्थिति में भ्रष्टाचार की बीमारी विकराल रूप लेते जा रही है।जिसका अंत होना तो दूर दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।समय रहते यदि इसके साख काटी नहीं जाए तो उसकी जहर समाज ही नहीं वरन देश के लिए भी हानिकारक है।अनियमितता की जद में आकर ग्रामीण आज दाने दाने को मोहताज हो रहे हैं आखिर हितग्राही अपनी व्यथा किसे सुनाए आज यह एक बड़ा सवाल समाज के लिए बन गया है।मामला कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम छतौना का है जहां ग्रामीणों की व्यथा सुन किसी के भी आंखों में आसूँ आ जाएगा। हितग्राहियों को शासन द्वारा कोरोना काल से ग्रामीण हितग्राहियों को राहत पहुंचाने दी जा रही अतिरिक्त चावल मिलना तो दूर खाद्य अधिनियम 2012 के तहत राशन कार्ड में दी जाने वाली राशन सामग्री मिलना ही दूभर हो गया है।ग्राम छतौना शासकीय उचित मूल्य की दुकान अंतर्गत 605 हितग्राही शासन की योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। जिसमें सभी हितग्राहियों को प्रति माह चावल मिल पाना टेढ़ी खीर बन चुकी है।  हितग्राहियों को राशन दुकान के संचालक द्वारा इस माह चावल खत्म हो गया है अगले माह ले लेना कह कर प्रति माह भटकाया जाता है। उक्त बात से व्यथित ग्रामीणों ने कोटा अनुविभागीय अधिकारी से राशन दिलाने लगाई गुहार।भ्रष्टाचार की जद में आकर ग्रामीण दाने दाने को मोहताज हो रहे हैं ।

 

 

 

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