छत्तीसगढ़

कोरोना काल में जो झोलाछाप डॉक्टर थे मसिहा माना जाता था आज वही डाक्टरों के खिलाफ कुछ पत्रकारों का कहर बरसाया जा रहा है।

 

कोरोना काल में जो झोलाछाप डॉक्टर थे मसिहा माना जाता था आज वही डाक्टरों के खिलाफ कुछ पत्रकारों का कहर बरसाया जा रहा है
कोरोना काल में जो झोलाछाप डॉक्टर थे मसिहा माना जाता था आज

वही डाक्टरों के खिलाफ कुछ पत्रकारों का कहर बरसाया जा रहा है

मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोनसरी मैं आयुर्वेदिक डॉक्टर करते हैं ईलाज क्योंकि आम आदमी को छोटे-छोटे बीमारी जैसे सर्दी खांसी हल्का बुखार इसक इलाज के लिए सोनसरी से लगभग 60 किलोमीटर बिलासपुर जाने में कई ग्रामीण असमर्थ रहते हैं जो आयुर्वेदिक डॉक्टर एवं अन्य डॉक्टर से इलाज कराते हैं क्योंकि हर आदमी को छोटी-छोटी तकलीफ होती है छोटे इलाज के लिए हर बार बिलासपुर नहीं जा सकते इसीलिए वह गांव की ही डॉक्टर से इलाज कराते हैं और सूत्रों के अनुसार पता चला था कि कुछ दिन पहले गांव के डॉक्टरों के ऊपर झूठे आरोप लगे थे कि यह डॉक्टर अच्छे से इलाज नहीं करते हैं और उनके पास डॉक्टर की डिग्री नहीं रहते हैं यह बुनियादी इल्जाम आयुर्वेदिक डॉक्टर चंद्रशेखर मुंडन पर लगाए गए थे जो कि झूठ थे क्योंकि ग्रामीणों से पूछने पर बताया गया कि यह आयुर्वेदिक डॉक्टर हमारे ग्राम पंचायत सोनसरी मैं अच्छे से इलाज करते हैं यह बात ग्रामीणों ने बताया उनके नाम गणेश पटेल नरेश पटेल जागेश्वर पटेल रामेश्वर साहू जो कि इस आयुर्वेदिक डॉक्टर से इलाज करवाते हैं उन्होंने बताया कि यह डॉक्टर अच्छे से इलाज करते हैं और बताया कि इस प्रकार के डॉक्टर के रहने से हमारे गांव में चिकित्सा की अच्छी सीधा रहती है जिसे हमें छोटी-छोटी बीमारियों की इलाज कराने में कोई दिक्कत नहीं होती है इस प्रकार के डॉक्टर हर गांव में होना चाहिए यह ग्रामीणों का कहना है जिससे सभी गांव के ग्रामीणों का इलाज होते रहे उन्होंने बताया कि जैसे हम बिलासपुर से इलाज करवाते हैं और वहां के डॉक्टर है रेफर कर देते हैं कि वहां के डॉक्टरों से आप अपना इलाज करवा लेना जैसे कि सूजी पानी लगवा लेना जिससे यहां के ग्रामीण आयुर्वेदिक एवं अन्य डॉक्टरों से इलाज करवाते हैं जिससे ग्रामीणों की सुविधा बनी रहती है।

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